Takdir ke mare bando ko


तकदीर के मारे बन्दों को शिरडी में बुलालो हे साँई
बड़ा जग की बलाएं घूर रहीं हमें उनसे बचालो हे साँई

दुनिया के सताए बन्दों को जब अपनी शरण में लेते हो
बन जाते कवच हो तुम उनका कोई आँच न आने देते हो
अब हाथ पकड़ के हमको भी ज़रा पास बिठालो हे साँई

साँई तान के चादर करुणा की सब कमियाँ हमारी ढक लेना
नस-नस ये हमारी विनती करे लाज श्रद्धा की मेरी रख लेना
संसार ने जिसको ठुकराया उसे गले से लगालो हे साँई

हम बेबस और कमज़ोर बड़े दु:ख कैसे ज़माने भर के सहें
जो दर्द हमारे दिल में है तुमसे न कहें तो किससे कहें
अब अपनी महर की छाया तले हम सबको छुपालो हे साँई

तकदीर के मारे बन्दों को शिरडी में बुलालो हे साँई

Posted By : Vinod Jindal on Jul 14, 2011


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