बà¤à¤—लिया मेरी à¤à¤¸à¥€ बनवइयौ सांई नाथ2
जिसमें सारी उमर कटजाय जिसमें सारा बà¥à¥à¤¾à¤ªà¤¾ कटजाय
बà¤à¤—लिया मेरी à¤à¤¸à¥€ बनवइयौ सांई नाथ
जहां बनाऊठकà¥à¤Ÿà¥€ में सांई वहीं धाम तेरा होवे
तेरे चरण की धूल उठाऊठफिर दीवार बनाकर के
लता-पता से बà¤à¤—ला छाना सांई ज़रा दया करके
दरवाज़े पर शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ लिखना2लिखना सबूरी किवाड़
बà¤à¤—लिया मेरी à¤à¤¸à¥€ बनवैयौ सांई नाथ
उस बà¤à¤—ले के अनà¥à¤¦à¤° सांई तेरा इक मनà¥à¤¦à¤¿à¤° होवे
मनà¥à¤¦à¤¿à¤° अनà¥à¤¦à¤° मेरे सांई की इक सà¥à¤¨à¥à¤¦à¤° मूरत होवे
मन à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ का हार बनाऊठतब इचà¥à¤›à¤¾ पूरी होवे
साà¤à¤ सवेरे उन à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ का तà¥à¤®à¤•ो हार पहनाऊà¤
बà¤à¤—लिया मेरी……………
à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤à¤¾à¤µ से à¤à¤°à¤¾ हà¥à¤† उस बà¤à¤—ले में कà¥à¤¨à¤¬à¤¾ होवे
शमा तातà¥à¤¯à¤¾ हों संग में और à¤à¤—त मà¥à¤¹à¤¾à¤²à¤¸à¤¾à¤ªà¤¤à¤¿ होवे
à¤à¤•à¥à¤¤à¤®à¤‚डली वहां विराजेऔर लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ माई होवे
चारों पहर की होय आरती नित-नित दरà¥à¤¶à¤¨ होय
बà¤à¤—लिया मेरी à¤à¤¸à¥€ बनवैयौ सांई नाथ……।
गà¥à¤°à¥‚वार के रोज़ वहां सांई तेरा à¤à¤‚डारा होवे
हलà¥à¤† पूरी और खिचड़ी का à¤à¥‹à¤— वहां लगता होवे
सांई के हाथों हांडी में à¤à¥€ कà¥à¤› पकता होवे
सांई पà¥à¤°à¥‡à¤® से à¤à¥‹à¤— लगावें जूठन मोहे मिल जाय
बà¤à¤—लिया मेरी…………………
चैत मास में नौंवी के दिन उरà¥à¤¸ à¤à¤°à¥‡ मेला होवे
यशà¥à¤¦à¤¾ ननà¥à¤¦à¤¨ पालने à¤à¥‚लें राम जनम सà¥à¤¨à¥à¤¦à¤° होवे
कà¥à¤µà¤¾à¤° मास में मने दशहरा तब उतà¥à¤¸à¤µ पूरा होवे
सांई नाथ कि चले पालकी मौं à¤à¥€ नाचूठगाऊà¤
बà¤à¤—लिया मेरी à¤à¤¸à¥€ बनवैयौ सांई नाथ
जिसमें सारी उमर कटजाय जिसमें सारा बà¥à¥à¤¾à¤ªà¤¾ कटजाय
ब।Bगलिया मेरी à¤à¤¸à¥€ बनवैयौ सांई नाथ
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