Paduka Ri Paduka Tu Hai Param Sevika


पादुका री पादुका तू है परम सेविका
पादुका री पादुका तू है परम प्रेमिका
तुझ में समाई है श्रीचरणों की सुवास
जिन श्रीचरणों की महिमा है ख़ास
रहती है तू नित्य सानिध्य में
करती है तू नित्य उनका आराधन
करती है तू नित्य चरनामृत का पान
प्रभु के चर्नार्विंद है तेरी पहचान
क्यों न हो तुझे इतना गुमान
गुरु चरनकमल है तेरी आन और शान
नित तू पीती है चरण कमल पराग
नित रहता तेरा मन मगन पाकर अनुराग
पादुका री तू धन्य धन्य है
तुझसा बडभागी कौन अन्य है ?
तू ही गुरु मनभावन है
तू ही अखंड सुहागन है

Posted By : Vinod Jindal on Jul 18, 2011


 
 

© 2020 Holydrops. All Rights Reserved   

Website Security Test