पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤®à¤¾à¤¤à¥à¤° की पीड़ा हरने वाले साई हरदम कहते, 'मैं मानवता की सेवा के लिठही पैदा हà¥à¤† हूं। मेरा उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ शिरडी को à¤à¤¸à¤¾ सà¥à¤¥à¤² बनाना है, जहां न कोई गरीब होगा, न अमीर, न धनी और न ही निरà¥à¤§à¤¨..।' कोई खाई, कैसी à¤à¥€ दीवार..बाबा की कृपा पाने में बाधा नहीं बनती। बाबा कहते, 'मैं शिरडी में रहता हूं, लेकिन हर शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥ के दिल में मà¥à¤à¥‡ ढूंढ सकते हो। à¤à¤• के और सबके। जो शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ रखता है, वह मà¥à¤à¥‡ अपने पास पाता है।'
साई ने कोई à¤à¤¾à¤°à¥€-à¤à¤°à¤•म बात नहीं कही। वे à¤à¥€ वही बोले, जो हर संत ने कहा है, 'सबको पà¥à¤¯à¤¾à¤° करो, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मैं सब में हूं। अगर तà¥à¤® पशà¥à¤“ं और सà¤à¥€ मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¥‡à¤® करोगे, तो मà¥à¤à¥‡ पाने में कà¤à¥€ असफल नहीं होगे।' यहां 'मैं' का मतलब साई की सà¥à¤¥à¥‚ल उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ से नहीं है। साई तो पà¥à¤°à¤à¥ के ही अवतार थे और गà¥à¤°à¥ à¤à¥€, जो अंधकार से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है। ईश के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ और साई गà¥à¤°à¥ के चरणों में शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾..यहीं से तो बनता है, इषà¥à¤Ÿ से सामीपà¥à¤¯ का संयोग।
दैनà¥à¤¯à¤¤à¤¾ का नाश करने वाले साई ने सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ कहा था, 'à¤à¤• बार शिरडी की धरती छू लो, हर कषà¥à¤Ÿ छूट जाà¤à¤—ा।' बाबा के चमतà¥à¤•ारों की चरà¥à¤šà¤¾ बहà¥à¤¤ होती है, लेकिन सà¥à¤µà¤¯à¤‚ साई नशà¥à¤µà¤° संसार और देह को महतà¥à¤µ नहीं देते थे। à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ को उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सांतà¥à¤µà¤¨à¤¾ दी थी, 'पारà¥à¤¥à¤¿à¤µ देह न होगी, तब à¤à¥€ तà¥à¤® मà¥à¤à¥‡ अपने पास पाओगे।'
अहंकार से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ और संपूरà¥à¤£ समरà¥à¤ªà¤£ के बिना साई नहीं मिलते। कृपापà¥à¤‚ज बाबा कहते हैं, 'पहले मेरे पास आओ, खà¥à¤¦ को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ करो, फिर देखो..।' वैसे à¤à¥€, जब तक 'मैं' का वà¥à¤¯à¤°à¥à¤¥ à¤à¤¾à¤µ नषà¥à¤Ÿ नहीं होता, पà¥à¤°à¤à¥ की कृपा कहां पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होती है। साई ने à¤à¥€ चेतावनी दी थी, 'à¤à¤• बार मेरी ओर देखो, निशà¥à¤šà¤¿à¤¤-मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ तरफ देखूंगा।'
1854 में बाबा शिरडी आठऔर 1918 में देह तà¥à¤¯à¤¾à¤— दी। चंद दशक में वे सांसà¥à¤•ृतिक-धारà¥à¤®à¤¿à¤• मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को नई पहचान दे गà¤à¥¤ मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤® शासकों के पतन और बरà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ हà¥à¤•ूमत की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ का यह समय सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ के विचलन की वजह बन सकता था, लेकिन साई सांसà¥à¤•ृतिक दूत बनकर सामने आà¤à¥¤ जन-जन की पीड़ा हरी और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जगाया, पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया यà¥à¤¦à¥à¤§ के लिà¤à¥¤ यà¥à¤¦à¥à¤§ किसी शासन से नहीं, कà¥à¤°à¥€à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से, अंधकार से और हर तरह की गà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ से à¤à¥€! यह सब कà¥à¤› मानवमातà¥à¤° में असीमित साहस का संचार करने के उपकà¥à¤°à¤® की तरह था। हिंदू, पारसी, मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤®, ईसाई और सिख..हर धरà¥à¤® और पंथ के लोगों ने साई को आदरà¥à¤¶ बनाया और बेशक-उनकी राह पर चले।
दरअसल, साई पà¥à¤°à¤•ाश पà¥à¤‚ज थे, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने धरà¥à¤® व जाति की खाई में गिरने से लोगों को बचाया और à¤à¤• छत तले इकटà¥à¤ ा किया। घोर रूढि़वादी समय में अलग-अलग जातियों और वरà¥à¤—ो को सामूहिक पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ करने और साथ बैठकर 'चिलम' पीने के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ कर साई ने सामाजिक जागरूकता का à¤à¥€ काम किया। वे दकà¥à¤·à¤¿à¤£à¤¾ में नकद धनराशि मांगते, ताकि à¤à¤•à¥à¤¤ लोà¤à¤®à¥à¤•à¥à¤¤ हो सकें। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ चमतà¥à¤•ृत करते, जिससे लोगों की पà¥à¤°à¤à¥ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ आसà¥à¤¥à¤¾ दृढ़ हो। आज साई की नशà¥à¤µà¤° देह à¤à¤²à¥‡ न हो, लेकिन पà¥à¤¯à¤¾à¤° बांटने का उनका संदेश असंखà¥à¤¯ à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ की शिराओं में अब तक दौड़ रहा है।
चणà¥à¤¡à¥€à¤¦à¤¤à¥à¤¤ शà¥à¤•à¥à¤²
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